University Education Commission

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  • Published : October 31, 2010
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Naitikata shabad me gahra marm chhipa hua hai, es marm ka arth bhi vayapak hai. Naitikta apne me teen cheejon ka samavesh karti hai 1.Kartavayparayanta 2.Vivekdrishti aur 3.Uncha uthne ki abhipsa. En teeno ke sanyog se hi naitikta ka nirman hota hai aur enhi tatvon se naitikta ka arth nikalta hai.

उस दिन वह शिक्षक अपनी पत्नी के ताने सुनकर घर से निकला था इसलिये उसकी मनस्थिति डांवाडोल हो गयी थी। दरअसल वह शिक्षक अपने यहां पढ़ने वाले छात्रों को बड़े मनोयोग से पढ़ाता था इसलिये उसके विषय में बच्चों का ज्ञान अच्छा हो गया था। अतः उसके यहां कोई ट्यूशन पढ़ने नहीं आता। पत्नी ने उस दिन उसे ताना यह दिया कि ‘देखो तुम्हारे दोस्त शिक्षकों के यहां कितने ढेर सारे बच्चे ट्यूशन पढ़ने आते हैं। एक तुम हो नालायक निकम्मे! अनेक विद्यालयों से नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाने पर नौकरी से निकाला जा चुका है। खुद तो फंसे ही हो बच्चों का भी भविष्य बिगाड़ते हो। पता नहीं मेरे बाप ने क्या सोचकर तुम्हारे साथ बांध दिया था? यह भी पता नहीं किया कि तुम तनख्वाह से अलग कुछ कमाना जानते हो कि नहीं। अतः विज्ञान का वह शिक्षक दुःखी था। उसके दिमाग में केवल पत्नी के ताने ही गूंज रहे थे। अपने अंदर की भड़ास निकालने के लिये कक्षा में आते ही अपने बच्चों को नैतिकता का पाठ पढ़ाना शुरु किया- ‘‘बच्चों, हमें चाहे कितना भी कष्ट हो पर ईमानदारी का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। जहां भी हम नौकरी करें अपना काम तनख्वाह से ही चलाने का प्रयास करना सबसे अच्छा है। ऊपरी कमाई की बात तो सोचना भी नहीं चाहिए। यह पाप है और राष्ट्र के साथ गद्दारी।’ वगैरह वगैरह।

अगले दिन बच्चों के अनेक पालक प्राचार्य के पास पहूंच गये। उन्होंने उसकी शिकायत की। एक ने तो यहां तक कहा कि ‘‘यह कौनसा शिक्षक आपने रखा है। हमारे बच्चों का भविष्य बिगाड़ रहा है। हम बच्चों को नौकरी करने के लिये पढ़ा रहे हैं तो केवल इसलिये नहीं कि केवल वेतन से घर चलायें। अरे, वेतन से भला घर चलते हैं। वह बीबी पाल लेंगे पर पर हम मां बाप को कहां से पालेंगे।’ प्राचार्य ने शिक्षक को बुलाया और उससे कहा-‘भईये, तुम क्या हमारे स्कूल को ताला लगवाओगे। मुझे तुम्हारे पिछले रिकार्ड का पता है इसलिये तुम्हें विज्ञान का विषय पढ़ाने के लिये दिया ताकि तुम नैतिकता का पाठ न पढ़ाने लगो। वैसे नैतिकता का पाठ पढ़ाना चाहिये पर बच्चों को नहीं बल्कि कहीं सेमीनार वगैरह हो, या कहीं आदर्श लोगों का सम्मेलन, तभी ऐसी बातें जमती हैं। अपनी ऐसी ही करनी की वजह से यह तुम्हारी बारहवीं नौकरी भी जा सकती है।’ उस शिक्षक ने प्राचार्य की बात सुनी। वहां बैठे पालकों को देखा। अब वह तेरहवीं नौकरी का आसरा इसलिये भी नहीं कर सकता क्योंकि नैतिकता के पाठ पढ़ाने की उसकी बदनामी अब सभी जगह फैल सकती थी। उसने वहां सभी से माफी मांगी और कहा-‘दरअसल, मैं भूल गया था कि बच्चों को पढ़ा रहा हूं। उस दिन मेरा स्वास्थ्य खराब था इसलिये ऐसी गलती कर गया। अब नहीं करूंगा।’ पालक खुश हो गये। प्राचार्य ने कहा-‘अच्छा है जल्दी समझ गये। तुम भी जरा व्यवहारिक हो जाओ। अपना वर्तमान बिगाड़ा है पर बच्चों को भविष्य मत बिगाड़ो। ऐसी शिक्षा कच्ची उम्र के बच्चों को मत दो जिनसे भविष्य में वह केवल उधार पर जिंदा रहने के लिये मजबूर हों।’ पालक चले गये और शिक्षक भी वहां से निकल आया। प्राचार्य ने अपने पास बैठे लिपिक से कहा-‘पता नहीं, कैसे इस मूर्ख शिक्षक को अपने यहां रख लिया।’

VALUE BASED EDUCATION.
Education in India in the olden days:
In India, education is called as | ‘Vidya’ . ‘Vidya’ is the word derived by combining two words ‘vid’ and ‘ya’. ‘Ya’means what and ‘Vid’ means light. So, that which gives light is ‘Vidya’. The preceptor is called ‘Guru’,and the pupil is called ‘Sishya’.The pupil gained education from the guru in the hermitages called ‘Gurukulam’. Guru means a great person.The ‘Gita’ depicts the ideal Guru and ideal Sishya thus the pupil is ‘Adhikaara murthi’ and the preceptor is ‘Avatara murthi’;Arjuna has earned the right to learn and Krishna has come as a man to teach.The pupil is Narothama ” (the best of men), the preceptor is ‘ Purushothama’ (the greatest among human beings).The pupil wields the bow, the Guru wields the secret of all skills. In the ancient hermitages after the pupil had finished his studies under the Guru, the Guru gave him such exalted advice as no pupil in any other country recived from his master i.e., Mathru Davo Bhava(may the mother be your God), Pithru Devo Bhava (may your father be your God),Acharyo Devo Bhava(may your...
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